Sunday, April 25, 2010

Search of Life

मुश्किल है जोड़ना इन्हें आसाँ है तोड़ना



रिश्तों की मासूमियत को कभी आज़मा के देख


इन्हें तोड़ने का शौक़ तेरा टूट जायेगा


ऐ तोड़ने वाले ज़रा रिश्ता बना के देख


रिश्तों की कसौटी पे खड़ी इंसानियत


इंसानियत के साथ कभी पेश आके देख


रौशन चिराग़ ज़िंदगी के हो जायेंगे


इक बार किसी दिल में रौशनी जलाके देख


बिखरा अँधेरा देख भागता दिल-ऐ नादाँ


घनघोर काली रात को अपना बना के देख


मुमकिन है ज़िंदगी में बड़ी तनहाइयाँ


तन्हाइयों के साथ कभी मुस्कुराके देख


राजीव त्रिपाठी






















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