१.वीरान ज़िन्दगी में मौसम बदल रहा , ये तेरे साथ का असर लगता है
दूर तक इस अँधेरे में जुगनू कोई , किसी रात का रहगुज़र लगता है
फिर वही ख्वाहिशें फिर वही आरज़ू , फिर उसे खोने का डर लगता है
छोड़कर वो चला जायेगा अजनबी, न जाने फिर क्यों हमसफ़र लगता है
२.माना की आसमान पे तारे हैं बेशुमार,लेकिन सभी उल्कों में रौशनी नहीं होती,
होता वजूद-ए-आसमान न ये गुरूर का, हम जिस पे खड़े गर वो ज़मीं नहीं होती
राजीव त्रिपाठी
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