Saturday, April 10, 2010

Meri kavitayen-Zazbaat

१.वीरान ज़िन्दगी में मौसम बदल रहा , ये तेरे साथ का असर लगता है


दूर तक इस अँधेरे में जुगनू कोई , किसी रात का रहगुज़र लगता है

फिर वही ख्वाहिशें फिर वही आरज़ू , फिर उसे खोने का डर लगता है

छोड़कर वो चला जायेगा अजनबी, न जाने फिर क्यों हमसफ़र लगता है

२.माना की आसमान पे तारे हैं बेशुमार,लेकिन सभी उल्कों में रौशनी नहीं होती,

होता वजूद-ए-आसमान न ये गुरूर का, हम जिस पे खड़े गर वो ज़मीं नहीं होती
 
राजीव त्रिपाठी

No comments:

Post a Comment